आज की शिक्षा प्रणाली से पूछता हूं ये सवाल,
क्या बस लक्ष्य है चलाना हमें भेड़ की चाल,
क्या शिक्षा तंत्र बस कुछ विषयों मे सीमट कर रह गया,
सहयोग करने की बजाय प्रतियोगिता में जोर देता रह गया,
क्या अंक लाने मात्र से शिक्षा के ज्ञान का अनुमान है लग जाता,
मात्र डिग्री पा लेने से क्या जीवन है संवर जाता,
श्रेष्ठ संस्थानों से लेकर आधुनिकता का ज्ञान,
जगा रहा है उम्मीद पाने की झूठी प्रतिष्ठा और सम्मान,
भूलकर शिक्षा का असली अर्थ बड़ा रहा झूठा अभिमान,
जीवन मुल्यो को त्याग डिग्री से बना रहा अपनी पहचान,
दोषी नहीं है इन परिणामों का कोई भी विद्यार्थी,
आज की शिक्षा प्रणाली है इसमे क्षमा प्रार्थी,
शिक्षा तो मार्ग है मानव जीवन को दिखाती,
मानव को जीवन के मूल्य है सिखलाती,
बस कुछ विषयों के ज्ञान मे यह नही है सिमटी,
ये तो जीवन को वास्तविक लक्ष्य से है जोड़ती,
अंधकार में ज्ञान की रोशनी है जलाती,
रिश्तों में प्रेम की मिठास है घोलती,
मानव का जीवन ये आदर्श है बनाती,
प्रकृति और प्राणियों के साथ हमारा सम्बंध है समझाती,
सबको एक साथ जुड़ने की राह ये दिखाती,
मानव को बन्धुत्व का सन्देश है सिखाती,
बस यही है विनती शिक्षा के असली लक्ष्य को हम जाने,
समाज मे अपनी जिम्मेदारी को मानव पहचाने,
प्रेम, शांति और बंधुत्व का संदेश हम फैलाए,
ज्ञान की जोत जलाकर हम आदर्श मानव कहलाए ||






One reply on “शिक्षा और जीवन”
so beautifully you explained Manish real meaning of education
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