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“बहना भी, रुकना भी”

तुम रुकती क्यों नहीं हो…?🌊

क्या कभी थकान तुम्हें भी छू जाती है,

या फिर तुमने थकना सीखा ही नहीं?

तुम्हारी हर लहर

मानो अपनी ही कोई कहानी लेकर उठती है, कभी शोर मचाकर,

कभी बिल्कुल खामोश रहकर;

पर हर बार कुछ न कुछ

अपने साथ बहा ही ले जाती है,

टूटे सपने, अधूरी बातें,और कभी-कभी उदासी।

तुम्हारा यूँ चलते रहना,

और तुम्हें यह भी पता होना कि कहाँ रुकना है और कितनी देर;

सिर्फ़ पानी का सफ़र नहीं लगता, यह तो जीवन का एक गहरा सबक लगता है, जहाँ रुकना भी ज़रूरी है,और चलना भी…

और दोनों का अर्थ खुद को पाना है।

तुम्हारी लहरों में एक अजीब-सी तसल्ली है, जैसे वे धीरे से कह रही हों,

“सब ठीक हो जाएगा,

बस बहते रहो, बस आगे बढ़ते रहो।”

और शायद इसी लिए

तुम्हारा यूँ बहना अच्छा लगता है…

क्योंकि तुम हर रोज़ फिर से जीना सिखा जाती हो, खामोशी में, गहराई में,और उम्मीद में।🤍

—अदिति 🙂

Aditi Kumari's avatar

By Aditi Kumari

SWAR Fellow at Mount Valley Development Association, Uttarakhand.

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