
समझने और समझाने का खेल है सारा,
कोई समझे बोझ और किसी को लगे प्यारा,
लेकर मन में नेक इरादे और उम्मीदों का सहारा,
इस प्यार को परखने स्वयं को मैने धरातल पर उतारा,
देख पाठशाला में बच्चों को हृदय मुझे यह समझाए,
जब मिला है मौका क्यूं ना फिर से बचपन को जिया जाए,
फिर सब कुछ भुलकर मैं बचपन में वापिस जाता हूं,
बचपन के लम्हों को मैं फिर से जी पाता हूं,
छोड़कर सारे कामकाज बस खेल में रंग जाता हूं,
नए साथियों के साथ खुद को नई उमंगों से भरा पाता हूं,
जब भी मैं बचपन में वापिस जाता हूं,
बच्चों के हृदय को गहराई से समझ पाता हूं,
उनको भी तलाश है एक ऐसे साथी की,
जो नींव रखे रिश्ते की दिया और बाती सी,
जो साथ खड़ा हो उनके प्रेम को साथ लिए,
जो गलती होने पर भी उसको हंसकर टाल दिए,
जो खेल–खेल में ज्ञान की जोत जगाए,
जो प्रेम की भाषा समझे और समझाए,
जिसको देख सभी बच्चों के चेहरे खुशी से खिल जाए,
जिसको पास बुलाकर बच्चे अपनी किस्से कहानियां सुनाएं,
इस नए बचपन को दिल से जीने लगा हूं मैं,
बचपन में लौटकर बच्चों के दिलों को समझने लगा हूं मैं,
बच्चों की पाठशाला का नया विद्यार्थी हूं मैं,
उम्मीद और प्रेम के रथ का सारथी हूं मैं,
इस लौटे बचपन ने मेरे व्यक्तित्व को निखारा है,
सारथी का यह किरदार मुझे लगने लगा प्यारा है,
बस यही समझना और खुद को समझाने का खेल है सारा,
हर एक बच्चा है धरती का चमकता हुआ सितारा ।।







