Categories
Fellowship

“खिचड़ी, मंत्र और गाँव का अपनापन: एक अनुभव जो दिल में बस गया। “

“ मिट्टी की सौंधी खुशबू में कुछ अपना सा एहसास मिला। बच्चों की हंसी में जीवन का सबसे बडा उपहार मिला।”

नमस्ते दोस्तों !

मैं रुतुजा सोनटक्के, और इस समय jSW फाउंडेशन फेलोशिप के तहत रत्नागिरी जिले के जयगढ़ गाँव में कार्यरत हूं। यहां एक खूबसूरत गांव है – Chaferi, जो मुझे बेहद पसंद हैं। यही मेरा फील्ड एरिया भी है, जहां मैं गांव की महिलाओं और जिला परिषद स्कूल की लड़कियों को सेल्फ डिफेंस सिखाने का काम कर रही हूं।

अपने घर से दूर रहकर, हर चीज खुद मैनेज करना आसान नहीं होता। मैं हर शनिवार सुबह 8 बजे फील्ड के लिए निकल जाती हूं, और इसी वजह से अक्सर नाश्ता करना रह जाता है। लेकिन इसी सफर मैं एक दिन ऐसा आया जिसने मेरे दिल को गहराई से छू लिया। धरती पर बैठकर भोजन का असली आनंदएक दिन, जब मैं फील्ड में काम कर रही थी, मेरे स्कूल के प्रिंसिपल जी ने मुझसे पूछा – “ अपने आज कुछ खाया ? “

मेरे ना कहने पर उन्होंने मुझे खिचड़ी खाने के लिए आमंत्रित किया। गांव के स्कूल में बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाना मुझे अपने बचपन की याद दिला गया। जैसे ही खिचड़ी की थाली सामने आई, बच्चों ने खाने से पहले मंत्र गाने शुरू किए। वे किसानों और भगवान को धन्यवाद दे रहे थे। यह मेरे लिए बिल्कुल नया था। मैंने भी कभी अपने स्कूल में ऐसा गाया नही था। अक्सर हम खाना खाते समय इन चीजों पर ध्यान नहीं देते, लेकिन यहां हर निवाले के पीछे एक कृतज्ञता छिपी थी।

“ जो अनमोल था, वो पास था, फिर भी उसे न पहचाना, गांव के बच्चो से सीखा, सादगी में ही था खजाना। “

खिचड़ी का स्वाद , जो यादों में बस गया शहरों में, हम ढेरो सुविधाओ के बीच रहते हैं। लेकिन फिर भी अधूरा महसूस होता है। लेकिन उस छोटे से स्कूल में, उन बच्चों के साथ, मुझे एक अजीब सी पूर्णता महसूस हुई। अब खिचड़ी मेरे लिए सिर्फ चावल और दाल नहीं रही, बल्कि अपनापन, प्रेम और आत्मीयता का स्वाद बन गई है। जब भी खिचड़ी खाती हूं, तो वो गांव, वो बच्चे और वो मंत्रो की गूंज याद आ जाती हैं।

आपका अनुभव? क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है, जो दिल को छू गया हो? गांव, सादगी, अपनापन – इनसे जुड़ी कोई याद?

Leave a comment