
जब नजर पड़ी दीवारों में,
आंखों ने देखा एक नजारा,
चींटियां चढ़ रही दीवारों पर लेकर भोजन सारा,
लग रहा जैसे मुझको दे रही हो इशारा,
जब आए परेशानी जीवन में तो बनो एक दूजे का सहारा,
छोड़कर आपसी मतभेद तुम निभाओ भाईचारा,
सुख और दुख तो मौसम की तरह बदलते हैं,
जैसे गर्मी की धूप के बाद शीतल जल के बादल बरसते हैं,

तु उम्मीद की किरण से अंधकार को मिटा,
रखकर हौंसला तु हिम्मत से अपना रास्ता बना,
सफर है मुश्किल धैर्य तु रखना,
उम्मीद और हिम्मत का दामन तु ना छोड़ना,
एक दिन सफलता की सीढ़ी भी तुझे मिलेगी,
जब हटकर बादल सूरज की किरणे भी तुझे सलाम करेगी,
जब हो जाए सफल तो मत भूलना जीवन का यह खेल सारा
जब आए परेशानी जीवन में बनना तू एक दूजे का सहारा–2

One reply on “एक दूजे का सहारा”
Beautiful lines and an inspiring poem by Manish Bhai.
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