लोगों ने मुझसे सवाल करना शुरू कर दिया है और यह एक अच्छा संकेत है।’ एक सरपंच होने के नाते मैं गांव के नागरिकों के प्रति जवाबदेह हूं और अब उन्हें मुझ पर भरोसा है। मैंने गांव के सबसे कमजोर लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने गांव की विकास योजना बनाना सीख लिया है।”दक्षाबेन चावड़ा, सरपंच, खंभरा ग्राम पंचायत_भुज
मार्च के दुसरे और तीसरे सप्ताह में हमारी ट्रेवल वर्कशॉप चल रही थी जो कच्छ जिला के भुज में थी|इस वर्कशॉप में कैसे हम अलग अलग संस्था के साथ जाकर समाज में जाकर उनके काम और परम्परा को समझ पाएं यह प्रक्रिया जारी था|
भुज गेहूँ, कपास, नमक और मवेशियों का व्यापारिक केंद्र है। ठप्पे की छपाई का कपड़ा, बंधेज, चाँदी का सामान और कढ़ाई वाले वस्त्रों के अलावा यह कच्छी हस्तशिल्प के लिए भी प्रसिद्ध है। भुज में देश का पहला बड़े पैमाने का सौर तालाब है।
हमने यहां अभी तक भुज के कई सारे आसपास के गावों को देखा जहां हर घर बुनाई और महिला कुछ न कुछ अपने घरों में करते है।इसके साथ साथ हमने सेतू नाम की एक संस्था के साथ बातचीत किए और उनके कामों के बारे में जाने।
मैं जब JSW फाउंडेशन फ़ेलोशिप में जुडी और अपने विषय(ग्राम पंचायत और महिला सशक्तिकरण) के अनुसार गावं और प्रोजेक्ट का लक्ष्य( महिला सभा ,ग्राम सभा महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ ग्राम विकास योजना (जीपीडीपी) बनाना और उसका उचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।)बनाया तो मुझे लगता था की यह लक्ष्य गावं के जरूरत के लिए बना तो दिया पर यह पता नही हो पायेगा या नही कोई अन्य संस्था इस तरह के विषयों पर काम करती भी है या नही|जब हमने इस वर्कशॉप के दौरान सेतु अभियान को विजिट की तब हमने पाया |
सेतू अभियान
https://setuabhiyan.org/rural-governance/ (Setuabhiyan)
स्थानीय शासन में नागरिक और समुदाय के विश्वास, समझ और जुड़ाव को मजबूत करना; और पारदर्शिता के साथ शासन करने और समावेशी, टिकाऊ, रचनात्मक और कुशल बनकर विकास सेवाएं प्रदान करने के लिए स्थानीय सरकारी निकायों (ग्राम पंचायत और नगर पालिकाओं) की क्षमताओं में सुधार करना।
154 ग्राम पंचायतों के साथ काम करने में SETU के प्रयास मुख्य रूप से ग्राम पंचायतों की उनकी भूमिकाओं को समझने, संविधान के 73वें संशोधन के तहत उनके पास मौजूद विधायी शक्तियों को पूरा करने, विकास की प्राथमिक एजेंसी बनने की उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने की क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में निर्देशित हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव करें, और लोकतांत्रिक तरीके से योजना बनाने, बजट बनाने(जीपीडीपी), अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने और ग्राम सभा के साथ पारदर्शी और जवाबदेही के साथ जुड़ने की उनकी क्षमता विकसित पर कार्य करता है।
इस बातचीत के दौरान एक विषय जो मुझे बहुत बेहतर लगा और मैं चाहूंगी की कैसे इसे अपने जगह में भी विकसित कर सकते है वह है:_

बालिका पंचायत
इसी एप्रोच के साथ गुजरात सरकार ने महिलाओं को सक्रिय रूप से बढ़ाने के प्रयास में स्थानीय लोगों की भागीदारी और जागरूकता ग्राम-स्तर पर शासन प्रक्रियाएँ महिला एवं बाल विकास विभाग गुजरात सरकार, “बेटी” के साथ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।जहां “बालिका पंचायत” का कांसेप्ट में 4 ग्राम पंचायत जो की भुज में यह पायलट प्रोजेक्ट की तरह शुरू किया गया जो सेतू अभियान के साथ मिलकर किया जा रहा है। इस पायलट का उद्देश्य युवाओं को सक्रिय रूप से शामिल करना था।महिलाओं और किशोरों के साथ उनके मुद्दे पंचायत के हितधारकों के रूप में सामना कर सकते हैं।
स्वयं और उनकी आवश्यकताओं और पहलों का प्रतिनिधित्व करते कैसे है जैसे विषय को लिया गया लिया गया। बालिका का विचार पंचायत को लड़कियों के लिए जगह बनानी थी।युवा महिलाएं औपचारिक रूप से कदम रखेंगी नेतृत्वभूमिकाएँ,समझना उनका जिम्मेदारियाँ और उनके निर्णय लेने का अधिकार, साथ-साथ भी विकेंद्रीकरण की प्रक्रियाओं को समझना।
रोचक जानकारी
1. यह प्रोजेक्ट में 11 से 21 तक की किशोरियों का समूह रहता है।
2. यह समूह जिस प्रकार गांव के सरपंच का वोटिंग सिस्टम से चुनकर आते है यही इसमें होती है वह किशोरी जो बालिका सरपंच बनेगी वह चुनकर आती है।इनका भी कार्यकाल पांच साल का होता है।
3. यह बालिका पंचायत कुछ निम्न विषयों पर ही काम करती हैऔर लड़कियों से जुड़ा रहता है।जैसे : कम उम्र में शादी,बेहतर शिक्षा(और यह मुद्दा यहां कोविड के बाद बढ़ा है इसी वास्ते इसपर काम होता है।)
4. गांव के मुख्य कार्य जिसपर सब की भागीदारी होनी चाहिए।
दोस्तों यह कांसेप्ट मुझे बहुत बेहतर लगा जहां मुझे लगता है की मिलकर कैसे संगठित होकर गांव के चुनिंदा विषयों को जोड़ सकती है को जोड़ पाए।
यह बस गुजरात सरकार ने यहां शुरू किया है मुझे लगता है इसके कुछ हिस्सों को बेहतर तरीके से समझ कुछ हिस्सों को अपने में ले सकते है|
