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आदर्श ग्राम_पाटोदा

‘सफलता ही कोशिश का सार्थक अर्थ माना जाता है।जहां उन्हें उन कामों को करने और दिखाने की अथक प्रयास रखती है।इन्हीं अथक प्रयास और कोशिश के लगातार कड़ी  की भूमिका निभाती है।’

दोस्तों, मैं बात कर रही हूं सुनहरे अवसरों के लाभ के जहां उनके गांवों में लोगों के सहभाग ने उस गांव को सफल बनाया है।आज इस गांव में अनेकों पुरस्कार हासिल किया है।जहां उस गांव को उनके द्वारा उपस्थित करता है। ‘पाटोदा’ एक ऐसा नाम जो कभी खुद को खुद के ख्वाब से जोड़ा और अपने समुदाय के लोगों को अपने स्वराज से पहचान दिया। सपनों के इस नई बंदिशों ने खुद को अपनी और तरकीब किया। पाटोदा एक ऐसा समाज जहां बहिष्कृत वर्ग के लोग एक स्थान पर आकर अपने निर्णयों को लेते और उसे प्रभावी रूप से आत्मता लाने में अपने सहयोग को देते है।

‘पाटोदा’

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के पाटोदा ग्राम पंचायत में जिसका जितना बड़ा घर उसका उतना ज्यादा टैक्स लगता है,लेकिन लोग यहां खुशी-खुशी टैक्स को जमा करते हैं इस गांव में सभी लोग टैक्स जमा करते हैं।

पटोदा ग्राम पंचायत की तस्वीरें 

विशेषताएं:_

1. महाराष्ट्र का अनोखा गांव जहां सब लोग टैक्स भरते हैं।

2. गांव में चार अलग – अलग प्रकार के मुक्त पानी, स्कूली बच्चों के लिए मुफ्त दूध की सुविधाएं प्राप्त करती हैं।

3. सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर अधिक जोर।

4. स्वच्छता का एक उदाहरण बनकर आगे बढ़ता गांव।

5. सीसीटीवी जैसी कई सारी सुविधाएं उपलब्ध।

देश में अब आदर्श ग्राम बनाने की संकल्पना शुरू हुई है लेकिन महाराष्ट्र का एक गांव कई साल पहले ही आदर्श गांव बन चुका था I यह गांव आज से करीबन 18 साल पहले यानी वर्ष 2005 में खुले में शौच मुक्त हो चुका था यह ऐसा गांव है जहां हर व्यक्ति टेक्स भरता है सुरक्षा के लिहाज में इस गांव में सीसीटीवी कैमरा भी लगाए गए हैं। इसके अलावा गांव में मुफ्त में आटा चक्की महिलाओं को रोजगार के अवसर देने के लिए उनके कार्यों को आसान बनाने के लिए गांव में पापड़ बनाने की मशीन भी उपलब्ध कराए गए हैं। कचरा निस्तारण के लिए भी पर्याप्त व्यवस्था की गई हैI हर घर के बाहर दो कचरे पेटी रखी जाती है जहां एक सूखा कचरा और दूसरे गिले कचड़े रखे जाते हैं ऐसी कई सारी विशेषताएं है जिसके बारे में मैं आगे बात करूंगी।

पुरस्कार कक्ष

ग्राम पंचायत की तस्वीरें 

महाराष्ट्र का आदर्श गांव:

महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर से 12 किलोमीटर दूर राज्य का यह आदर्श गांव ‘पाटोदा’ है। यह सामान्य गांव नहीं बल्कि एक आदर्श गांव के रूप में पूरे राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में जाना जाता है। इस गांव में हर एक प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध है जिसके उपलब्धि के खुशी पर देश के बड़े-बड़े शहरों से लोग यहां इस गांव के उपलब्धियों को देखने आते हैं। गांव के पूर्व सरपंच भास्कर पेरे पाटील अपनी टीम के साथ कई वर्षों से गांव को बेहतरीन बनाने के काम में जुटे हुए हैं।

हर घर टैक्सपेयर:

यह जानकर हैरानी होगी कि लगभग एक सौ फ़ीसदी सच है कि यह गांव में शत-प्रतिशत सभी लोग टैक्स भरते हैं जिसके बदले में ग्राम पंचायत भी उन्हें कई सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध कराती है जिसमें गेहूं की पिसाई, दाल की पिसाई, मिर्च की पिसाई, सेवइयां बनाना, मसाला पिसाई जैसे कई सारी सुविधाएं प्रमुख है। गांव के पूर्व सरपंच कहते हैं कि मुफ्त में गेहूं की पिसाई का देश में पहला प्रयोग हैI 750 परिवारों वाले इस गांव की आबादी करीबन 3500 के आसपास है साल भर में करीबन 20 लाख रूपये टैक्स के रूप में जमा होते हैं।

सभागृह पटोदा 

CCTV Wi-Fi से युक्त और कचरा मुक्त यह आदर्श ग्राम:

गांव की सुरक्षा के लिहाज में हर जगह पर सीसीटीवी कैमरा लगाए हुए हैं और कंट्रोल रूम के जरिए इसकी मॉनिटरिंग भी की जाती है। हर नागरिक तकनीकी से जुड़ पाए इसके लिए वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ग्रामवासी कहते हैं कि “कई जगहों पर घूमने फिरने के बाद यह पाया गया कि गंदगी पर नियंत्रण और उसका निस्तारण करना बेहद जरूरी है इसीलिए हर घर के बाहर दो कचरे की डब्बी लगाई गई है जिसमें गांव के नागरिक गीला कचरा- सूखा कचरा अलग-अलग डालते हैं और उसके बाद इस कचरे को इकट्ठा कर उसमें से खाद बनाई जाती है” गांव में हर गली के मुहाने पर एक वाश बेसिन भी लगाया गया है ताकि आते जाते हुए व्यक्ति इनका इस्तेमाल कर सके और स्वस्थ रह सके।

ग्राम पंचायत कक्ष में सीसीटीवी

ग्रामीणों के लिए चार अलग-अलग प्रकार के पानी की सुविधा:

हमें पीने के पानी की समस्याएं नागरिकों को अक्सर उठानी पड़ती है लेकिन पाटोदा ग्राम में यह तकलीफ बिल्कुल भी नहीं हैIइस गांव में नागरिकों को मुफ्त में ठंडा और गर्म पानी 24 घंटे उपलब्ध कराया जाता है इतना ही नहीं एमआईडीसी की तरफ से 24 घंटे पानी की सुविधा इस गांव में उपलब्ध कराई जाती है जिसके लिए गांव के हर घर के बाहर नल लगे हुए हैं और उसी नल के पास उस पानी का मीटर। आदमी जितना पानी इस्तेमाल करता है उसकी मीटर उसी तरह से रीड करती है और उसमें उसके अंकित दर्ज हो जाते हैंI नागरिकों को शुद्ध पीने युक्त पानी उपलब्ध कराया जाता है एक नागरिक को 20 लीटर पानी दिया जाता है जिसके लिए उन्हें एक स्मार्ट कार्ड भी दिया गया है जिसकी मदद से वह खुद जाकर मशीन से आरो का पानी लेते हैं। यही नहीं इस गांव में चार अलग-अलग प्रकार के धोबी घाट बनाए गए हैं जहां पर पूरे गांव के लोग अपनी समय युक्त के अनुसार आकर अपने कपड़े को धोते हैं और एक जगह पानी एकत्रित होकर व सिंचाई के तौर पर उस पानी का इस्तेमाल किया जाता है।

पिने योग्य पानी 

धोबी घाट 

गर्म पानी के संसाधन 

सौर ऊर्जा के इस्तेमाल पर अधिक जोर:

गांव के पूर्व सरपंच भास्कर पेरे पाटील बताते हैं कि उन्होंने और उनकी टीम ने गांव को सोलर एनर्जी का पर्याप्त मात्रा में इस्तेमाल करने का फैसला किया था I जिसके जरिए अब गांव के नागरिकों को गर्म पानी मुहैया कराने के लिए इसी सौर ऊर्जा के चलने वाले हीटर का इस्तेमाल होता है, सड़कों पर लाइट और घरों में लाइट ज्यादातर सोलर एनर्जी से जलती है जिससे बिजली की भी बचत होती है और पर्यावरण का भी नुकसान नहीं होता है।

सौर उर्जा जिसका प्रयोग गावं को कम लागत में सुंदर और स्वच्छ बनाने का 

महिला- पुरुष को समान दर्जा देने वाला यह संदेश आदर्श ग्राम पाटोदा करती है:

यह ग्राम की खासियत है कि हर घर के दरवाजे पर एक नाम की तख़्ती(नेम प्लेट) लगवाई जाती हैं। उस नेम प्लेट पर घर के मुखिया और उनकी पत्नी का नाम लिखवाया जाता है जिसके जरिए गांव में महिलाओं और पुरुष में समानता का संदेश दिया जाता है। बच्चों की पढ़ाई के लिए आधुनिक आंगनवाड़ी है जहां पर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध है इनके अलावा गांव में मौजूद जिला परिषद् स्कूल में भी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है प्रोजेक्टर के रूप में बच्चों को नयी आधुनिक शिक्षा दी जाती है, साथ ही साथ बच्चे अपने आसपास के चीजों से कैसे पढ़े इसके लिए पूरे जिला परिषद के स्कूल को रंगीन कर दिया गया है ताकि बच्चे अपने दीवारों पर बने चित्र और लिखावट से अपने शब्दों को आगे बढ़ा पाए।

जिला परिषद शाला 

जिला परिषद शाला 

ग्रामीण का घर उसके नेम प्लेट के साथ 

ग्रामीणों का सम्मान करती है पाटोदा:

गांव में मौजूद वरिष्ठ नागरिकों का ग्राम पंचायत की तरफ से विशेष ध्यान रखा जाता है उनको बैठने के लिए एक आराम और व्यवस्थित जगह बनाई गई हैI गांव में जिन लोगों कि देखरेख के लिए कोई नहीं है उनके लिए ग्राम पंचायत खर्चा उठाती है और उनका ध्यान रखती हैं। चौक पर लगा डिजिटल बोर्ड जो गावं के लोगों के लिए सुचना के जैसा है जहाँ दिन, दिवस और तारीख के साथ- साथ पूरा गांव जहां पर मिलकर जन्मदिन मनाते हैं, जिसमें गांव की पूरी जनसंख्या और उसमें रहने वाले महिला-पुरुष की संख्या दिखाई जाती है इसके अलावा गांव में भी जिस भी व्यक्ति का जन्मदिन होता है उसके जन्मदिन को भी उस डिस्प्ले बोर्ड पर दिखाया जाता है जिसके जरिए पूरा गांव उस व्यक्ति का जन्मदिन साथ मिलकर मनाता है जहां यह संदेश गांव ग्रामवासियों को देना चाहती है कि यहां लोगों के बीच प्यार और भाईचारा बढ़ाने का अथक प्रयास किया जाता है।

डिजिटल बोर्ड 

गावं के भ्रमण में भी बहरी वयक्ति अनुदान राशी देते

पानी है अनमोल, व्यर्थ नहीं इसका जाता है:

गांव के लोग कहते हैं कि गांव में पानी एक भी बूंद व्यर्थ नहीं जाता है गांव दूषित पानी को भी ट्रीटमेंट देकर उसका खेती में इस्तेमाल किया जाता है गांव में शमशान भूमि भी निर्माण कराया गया है गांव जब कोई व्यक्ति गुजर जाता है तो स्मृति चिन्ह के रूप में उनके नाम को वहां बनाई गई कुर्सियों पर अंकित कराया जाता है।

व्यर्थ पानी का उपयोग सिचाईं में 

शमशान भूमि

साफ सड़कें और साफ है नली:

ग्रामवासी सखहारी पेरे पाटील बताते हैं कि हमारे गांव में सभी सड़कें पेवर ब्लॉक से बनाई गई है और यहां पर आपको ढूंढने पर भी सड़क पर गड्ढा नहीं मिलेगा I पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए हर साल यहां पर सड़कों के किनारे पेड़ लगाए जाते हैं जिसके चलते यह गांव आपको हमेशा हरा-भरा नजर आता है।

देश के 11 बेहतरीन ग्राम पंचायतों में से 1 ग्राम पंचायत औरंगाबाद जिले के पाटोदा ग्राम पंचायत को भी मानी जाती है। केंद्र सरकार से यह सम्मान इस ग्राम पंचायत को भी प्राप्त हुआ है देश भर की ग्राम पंचायतों से कई प्रतिनिधिमंडल अक्सर पाटोदा ग्राम आते हैं ताकि वह भी अपने ग्राम और ग्राम पंचायत को ऐसा ही खुशहाल और हरा-भरा बना सकें।

ग्राम पंचायत के बाहरी द्वार 

हरयाली का सन्देश 

निष्कर्ष:

ग्राम पंचायत पाटोदा को घूमने के बाद यह समझ बनवाया है कि 1 गांव को आदर्श बनने में लोगों केसहभाग की जरूरत होती है जहां पर एक विचार से कोई भी कार्य पर आगे बढ़ पाए और उस पर एक्शन ले पाए यह गांव आज भी अपने किए गए बदलावों से ऊंचाइयों की ओर जा रहा है जहां पर एक सुरक्षित माहौल देना आवश्यक होती है जो यह दे पा रही है।

मेरे अनुभव:

एक सुनहरे अवसरों से यह गांव को समझने और नजदीक से जानने का मौका मिला मुझे इस बात की खुशी हुई कि इस गांव के इतिहास से लेकर वर्तमान तक के कहानियों को समझ पाए और यह मेरी उपलब्धि थी कि मैंने इस तरह के ग्राम पंचायत को देखने के साथ साथ में अपने परियोजना पर कार्य के लिए सोच पा रही हूँ।

आशा करती हूं इस तरह से खास ग्राम पंचायत को नजदीक से जानने और समझने के साथ-साथ मेरे परियोजना में इस गांव से मैं कुछ से लेकर जा रही हूं जो मैं अपने परियोजना में उसे बेहतर बनाने के साथ कार्य कर पाऊंगी।

धन्यवाद!!

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