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‘कहते हैं ना हर आज का अपना एक कल होता है।’

आज इन्हीं पंक्तियों ने कुछ खुद में नए सपनों के सफलताओं को उजागर करने की चाह में आगे बढ़ गई।

दोस्तों ऊपर की कही गई पंक्तियां आदर्श ग्राम,जो की कई सालों पुराने दशकों में ले जाकर एक अतीत को वर्तमान से जोड़ते हुए सपनों को जीने का आकार दिया है और उसे साकार करने में ग्रामवासीयों ने ऊपर लाया है।

आदर्श ग्राम – हिवरे बाजार 

कहते हैं ना कि खुद की किस्मत लिखने वाले हम खुद होते हैं, उसी प्रकार यह बात हमें अपने आसपास, अपने परिवार और समाज में भी दिखती है जहां हम रहते हैंI आज मैं जिस गांव की बात कर रही हूं उस गांव की किस्मत को गांव के लोगों ने लिखी है जो कि साल 1990 में 95% गरीब परिवार रहते थे।गांव और आस – पास पीने के लिए पानी नहीं था लेकिन आज उस गांव की किस्मत बदल गई।

ग्राम के पूर्व सरपंच आदरणीय पोपट राव पवार जी  

हिवरे बाजार गांव महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में है। महज 305 परिवार का गांव और इनमें से 75% लोग गांव के मुकाबले करोड़पति माने जाते हैं यह चौंकाने वाली बात है लेकिन यह सच है।

यही नहीं हिवरे बाजार गांव को भारत का सबसे अमीर गांव कहा जाता हैI जहां पूरे गांव को साथ लेकर चलने और कृषि पर जोर देने से वहां की जीडीपी(सकल घरेलू उत्पाद)बढ़ गई साथ ही साथ गांव में गरीबी खत्म हो गईI जो लोग शहरों की तरफ पलायन हो रहे थे वह अब वापस आ गए। अब लोग गांव में रह कर ही खेती ग्रहस्थी करते हैं Iयहां तक कि जो लोग गांव छोड़- छोड़ कर शहर चले गए थे वह अब वापस गांव आकर अपनी खेती- बारी देखते हैं और खेती करते हैंI गांव के पूर्व सरपंच पोपटराव पवार का नाम देश के उन लोगों में गिना जाता है जिन्होंने अपने बदौलत पूरे गांव की किस्मत के साथ-साथ तस्वीर बदल दी और यही नहीं पोपटराव पवार से आज उनके गांव के लोग नहीं बल्कि बाहर और आसपास के राज्यों के लोग भी आकर उनसे सीख लेकर खेती, ग्राम विकास और किसानी में नए-नए प्रयोगों को कर रहे हैं।

काफी दशक पहले हिवरेबाजार भी दूसरे गांव की तरह खुशहाल था लेकिन 1970 के समय यह गांव अपने हिंदकेसरी पहलवानों के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन हालात और समय के बिगड़ते दौरे में सरपंच पोपटराव पवार कहते हैं कि “हिवरेबाजार 80 से 90 दशक में भयंकर सूखे से जूझा। पीने के लिए पानी नहीं बचा, कुछ लोग अपने परिवारों के साथ पलायन कर गए, गांव में केवल 93 कुएं थे जलस्तर भी 82 से 110 फीट पर पहुंच गया लेकिन फिर लोग ने खुद को बचाने की प्रणाली शुरू की।

उपलब्धियां ग्राम के पूर्व सरपंच आदरणीय पोपट राव पवार जी प्राप्त की है 

ग्राम की पैरामीटर: कैसे बदली हिवरे बाजार की प्रणाली?

साल 1990 में एक कमेटी ‘ज्वाइंट फॉरेस्ट मैनेजमेंट कमेटी’बनाई गई थी और उसके तहत गांव में कुआं खोदने और पेड़ लगाने का क्रम का काम श्रमदान के जरिए शुरू किया गया था I इस गांव में महाराष्ट्र एंप्लॉयमेंट गारंटी स्कीम के तहत फंड मिला जिससे काफी गांव के विकास में मदद मिली I साल 1994 से 95 में आदर्श ग्राम योजना आई जिसने इस गांव को काम की चलते रफ्तार और बढ़ गई फिर कमेटी ने गांव को उन फसलों को बैन कर दिया जिसमें ज्यादा पानी की जरूरत थी और गांव में प्याज, गेंदा जैसे फसलों का खेती शुरू हो गया, और गन्ना जैसे अधिक पानी लेने वाले खेती को रोक दिया गया I गांव में एकजुट लोगों का कहना था कि जिस फसल में ज्यादा पानी की जरूरत थी वह हम लोग नहीं लगाएंगे जिसमें कम पानी की जरूरत होगी और व्यापारी स्रोत बनेंगे हम उस फसलों की खेती करेंगे। गांव के सरपंच पोपटराव पवार के मुताबिक गांव में अब 340 कुएं हैं और ट्यूबवेल खत्म हो गए हैं जल स्तर 30 से 35 फीट पर आ गया है। भौगोलिक क्षेत्रों में 3 लाख से भी ज्यादा पेड़ पौधे लगाए गए हैं।

लोगों की बढ़ती आमदनी:

गांव में अब 305 परिवार है। इनमें करीबन 1300 लोग हैं इनमें से 75% लोग स्रोतों के आधार पर करोड़पति परिवार माने जाते हैं। 50 से ज्यादा परिवारों की वार्षिक आय लगभग 10 लाख से ज्यादा है I गांव की प्रति व्यक्ति आय देश के शीर्ष 10% ग्रामीण क्षेत्रों के औसत आय(890 रूपये प्रति माह)की दोगुनी है। यानी पिछले 15 वर्षों में औसत आय 20 गुनी हो गई है। पोपटराव पवार जी कहते है  सर्वेक्षण के मुताबिक 1995 में 180 में से 168 परिवार गरीबी रेखा के नीचे थे, 1998 के सर्वेक्षण में संख्या 53 हो गई और अब यहां केवल 3 परिवार इस श्रेणी में है। गांव में गरीबी रेखा के लिए अपने अलग मानदंड तय किए गए जो लोग इन मानदंडों में प्रतिवर्ष 10 हजार भी खर्च नहीं कर पाते हैं वह श्रेणी में आते हैं यह मानदंड अधिकारिक गरीबी रेखा से लगभग 3 गुना है।

व्यवसाय के संसाधन – डेयरी 

फसलें

7 सूत्री पर काम करता है हिवरे बाजार:

पूर्व सरपंच के मुताबिक गांव में लोगों के लिए 7 सूत्र हैं यहां के सूत्र और पंचायत के लिए रूपरेखा गांव के लोग मिलकर इसे तैयार करते हैं।

१. रोड से पेड़ नहीं काटना

२. परिवार नियोजन

३. नशाबंदी

४. श्रमदान

५. लोटा बंदी

६.हर घर में टॉयलेट

७.ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट

महिला उद्यमी – लक्ष्मी ताई 

योजना सालों की नही उनके कामों की होती है:

पूर्व सरपंच कहते हैं कि गांव को बचाने के लिए ‘यशवंत एग्री वाटर शेड डेवलपर्स’ NGO के साथ मिलकर 5 साल का प्लान बनाया गया था इसके बाद गांव में कुएं खोदे जाने लगे थे, पेड़ लगाने लगे थे लगभग गांव में एक सौ फ़ीसदी शौचालय वाले गांव में शुमार करना था उन्होंने बताया कि एक बार लोग जुड़े तो जुनून से कुछ ऐसा हो गया कि 5 साल का योजना 2 साल में ही खत्म हो गया।

बदलता हिवरे बाज़ार

ग्राम दर्शन – हिवरे बाज़ार 

ग्राम संसद और इसी भवन में बैंक और महाराष्ट्र का छोटी शाखा  

जिला परिषद् शाला – हिवरे बाज़ार 

उपलब्धियां – ग्राम के पूर्व सरपंच आदरणीय पोपट राव पवार जी प्राप्त की है 

आरोग्य उपकेन्द्र – हिवरे बाज़ार 

मुख्य फसलें:

पहले इसी गांव में गन्ना, ज्वार आदि की खेती होती थी लेकिन अब यह सब में रोक लगा दिया गया,अब यहां प्याज,आलू और फूलों की खेती होती है। साथ ही साथ लोग अपने बाग- बगीचे में अनार और संतरे जैसे फलों की खेती करते हैं।सरपंच पोपटराव पवार ने बताया कि “गांव के लोग अब बारिश का इंतजार नहीं करते हैं कम पानी की फसल का उन्हें फायदा होने लगा है।”

 आदर्श ग्राम हिवरेबाजार पानी की समस्याओं से निपटने के लिए अपने क्रॉपिंग पेटर्न को बदला और पानी ज्यादा उपयोग करने वाली फसल को छोड़ने का फैसला लिया।

आदर्श ग्राम – हिवरे बाज़ार 

जल बजट – हिवरे बाज़ार 

सहभागिता सुनिश्चित हिवरे बाजार:

गांव की स्वच्छता को देखते हुए पूर्व सरपंच कहते हैं कि “गांव से एक मच्छर निकाल दो एक सौ रुपए ले जाओ”। यह सब भाईचारा लोगों के आपस में मानसिक बदलाव और खुद को बढ़ोतरी के सपने में बढ़ने से दिखा है। यही नहीं अब आस-पास के गांव में भी उस गांव से पेयजल की आपूर्ति की जाती है टैंकरों के माध्यम से जहां गांव की आमदनी भी बढ़ती है साथ ही साथ व्यापार में भी बदलाव देखने को मिला है जहां डेयरी का व्यवसाय किया जाता है और आसपास के गांव में वह एक आपूर्ति के रूप में देखा जाता है वही हिवरेबाजार के लोगों के लिए वह उनके व्यवसाय को बढ़ोतरी देता है। गांव में नगर परिषद शाला से लेकर उच्च शाला जहां केवल उसी गांव के बच्चे नहीं बल्कि आसपास के 30 से 40% बच्चे उस गांव में पढ़ने के लिए आते हैं गांव के एक हिस्से विद्यालय में भी पानी के बचाव, पेड़ – पौधे लगाने जैसी तहजीब दी जाती है। इस गांव में आज भी कई अलग-अलग राज्यों से लोग प्रशिक्षण लेने और अपने गांव को बेहतर बनाने के लिए लोग आते हैं। साथ ही साथ हर  महिलाओं के बचत गट समूह की चर्चाएं होती है और महिला खुद में सशक्त हो पाए वह अपने बच्चों को सशक्त बना पाए इसी प्रारूप में हिवरेबाजार ग्राम पंचायत  में ही बैंक ऑफ महाराष्ट्र ब्रांच खोला गया है जहां पर लोग अपने पैसे का हिसाब -किताब खुद रखते हैं।  आपस में लोगों के भाईचारा को बढ़ाने के लिए केवल एक परिवार मुस्लिम होने पर उन्हें मस्जिद का स्थान दिया गया जहां पर वह अपने संस्कृति को बनाए रखें हैं। गांव के वाचनालय में प्रमुख पत्रिका नियम से आते हैं और वहां के लोग उसका फायदा उठाते हैं और साथ ही साथ शाम में  समय मिलने पर आपस में मेलजोल की भाईचारा को देखते हुए लोग अपने सुर से सुर मिला कर एक साथ बैठकर भजन कीर्तन भी करते हैं।

आज यह आदर्श गांव बाकी गावों के लिए एक मार्गदर्शन की भूमिका निभाती है।

“भारत अपने गांवों में बसता है।” – महात्मा गांधी 

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